22 खूट परिवार मोतिया | गोड्डा, झारखण्ड
22 खूट परिवार मोतिया
गोड्डा, झारखण्ड
माँ त्रिपुर सुंदरी
॥ कुलदेव्यै नमः ॥
जय माँ त्रिपुर सुंदरी
─── ✦ ───
माँ त्रिपुर सुंदरी
22 खूट परिवार मोतिया
गोड्डा, झारखण्ड
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ॐ

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

22 खूट परिवार मोतिया
शांडिल्य गोत्रीय • मोतिया, गोड्डा, झारखण्ड
✦ संकलन एवं लेखन ✦
श्री माधव चंद्र चौधरी श्री अवधेश चौधरी
इतिहास की यात्रा

अतीत का दर्पण

16वीं शताब्दी — आगमन की कहानी

16वीं शताब्दी में “शांडिल्य गोत्रीय खड़ौहर–एकमा, जिला–सुपौल” बिहार निवासी जुड़ान ठाकुर के वंशज कमलनयन ठाकुर, 7वीं पीढ़ी का आगमन मोतिया में कैसे हुआ, इसकी भी एक रोचक कहानी है।

श्री कमल नयन जी प्रत्येक वर्ष सुलतानगंज से वैद्यनाथ धाम (देवघर) एवं वासुकीनाथ काँवर लेकर बाबा को जल अर्पित करने के लिए आते थे। आने के क्रम में उनके ठहरने की व्यवस्था बनेली स्टेट द्वारा ‘फागा’ की जमींदारी (रियासत) में की जाती थी।

यात्रा का दूसरा पड़ाव ‘हँडवा’ स्टेट द्वारा नौनीहाट में आने-जाने के क्रम में होता था।

कुंजेमान जी का विवाह एवं मोतिया से संबंध

एक बार कमलनयन जी अपने पुत्र कुंजेमान के साथ जल चढ़ाने के लिए आये थे। पूजा-पाठ के बाद लौटने के क्रम में ‘फागा’ में एक सज्जन से उनकी मुलाकात हुई।

रात्रि विश्राम के दौरान उक्त व्यक्ति ने उनके पुत्र कुंजेमान की शादी का प्रस्ताव रखा। इस पर कमलनयन जी ने अपनी सहमति दे दी।

शादी के उपहार में कुंजेमान जी को हजारों एकड़ जमीन उपहार स्वरूप मोतिया क्षेत्र में प्राप्त हुआ।

मालपोखर एवं निलजी नदी के किनारे निवास

उपहार में प्राप्त जमीन पर अपना आधिपत्य स्थापित करने हेतु उन्होंने मोतिया–डुमरिया के बीच अपना आवास निर्धारित किया, जो आज का मालपोखर क्षेत्र है।

कालान्तर में वहाँ से नदी के किनारे जा बसे। आज मोतिया के भुवनेश्वर झा, छेदी चौधरी, उमेश चौधरी इत्यादि के कटहा, आम बगीचा में निलजी नदी के किनारे अपना आवास स्थापित किया।

वहाँ घना जंगल एवं जंगली जानवरों के आक्रमण के चलते परेशानी काफी बढ़ने लगी। इसी स्थिति में उन्होंने अपना स्थान परिवर्तन कर सुसनियाँ डीह में किया, जो वर्तमान मोतिया गाँव से लगभग 1/2 किलोमीटर पूर्व स्थित है।

औघड़ से भेंट और माँ भगवती की आराधना

समय बीतता गया। कुंजेमान जी की उम्र लगभग 40–45 वर्ष हो चली। उन्हें एक भी संतान नहीं हुई। इससे वे मानसिक रूप से काफी चिंतित रहने लगे।

बताया जाता है कि उसी दौरान एक दिन उनकी मुलाकात एक औघड़ से हुई। उन्होंने अपनी पीड़ा और व्यथा उनसे साझा की।

औघड़ ने संतान प्राप्ति के लिए उन्हें दो सुझाव दिये— पहला स्थान बदलने का और दूसरा माँ भगवती की पूजा-अराधना प्रारंभ करने का।

वर्तमान मोतिया में स्थायी वास

औघड़ की सलाह के अनुसार उन्होंने अपना आवास सुसनियाँ डीह से वर्तमान मोतिया गाँव स्थित उस भूखंड पर स्थानांतरित किया, जहाँ आज बाईस खूट का परिवार वास करता है।

यहाँ अपना वास स्थान बनाने के साथ उन्होंने कई जाति और वर्ण के लोगों को भूमि देकर बसाने का कार्य भी किया।

माँ भगवती त्रिपुरसुंदरी की पूजा का शुभारम्भ

उस समय कैंथिया ग्राम (बसंतराय प्रखण्ड) में प्रकांड विद्वान पुरोहित रहा करते थे। उनसे सम्पर्क स्थापित कर माँ भगवती की मणिपत्रिका त्रिपुरसुंदरी की पूजा का शुभारम्भ किया गया।

माँ कामदा भगवती की असीम कृपा से उन्हें तीन पुत्र प्राप्त हुए—

वंश की महत्वपूर्ण कड़ी

कुंजेमान जी के तीन पुत्र

१

नन्दलाल चौधरी

श्रेष्ठ पुत्र

२

श्यामलाल चौधरी

मध्य पुत्र

३

हीरालाल चौधरी

अनुज पुत्र

इसी कालान्तर में ब्रिटिश सरकार की जमींदारी प्रथा के तहत मालगुजारी वसूली कार्य करवाने के लिए उन्हें “चौधरी” की उपाधि से अलंकृत किया गया। तब से कुंजेमान जी चौधरी साहब कहलाने लगे और समाज में लोग उन्हें चौधरी साहब के नाम से जानने लगे।

यहीं से चौधरी परिवार का प्रादुर्भाव हुआ।

विरासत की निरंतरता

परम्परा आज भी जारी

आज का 22 खूट चौधरी परिवार उसी निरंतरता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। तब से अब तक माँ भगवती की आराधना परिवार में अनवरत जारी है। माँ भगवती त्रिपुरसुंदरी परिवार की धुरी बनी हुई हैं।

कुंजेमान जी द्वारा प्रारंभ की गई परम्परा का निर्वहन आज भी चौधरी परिवार अर्थात कुंजेमान जी के वंशज करते आ रहे हैं।

माँ मणिपत्रिका त्रिपुरसुंदरी की पूजा मोतिया ग्राम स्थित चौधरी परिवार 22 खूट के मंदिर में धूम-धाम से प्रतिवर्ष मनाई जाती रही है।

कुंजेमान जी के तीन पुत्रों से प्रारंभ हुए वंशजों ने अपनी एकजुटता बनाए रखने और कुल की परम्परा को संजोये रखने के लिए परिवार को खूट में विभक्त कर माँ भगवती की पूजा-अर्चना, आराधना एवं साधना सामूहिक रूप से करना जारी रखा।

कालान्तर में परिवार बढ़ता गया और एक से अनेक हुए, लेकिन परिवार की विरासत और पूजा-पद्धति आज भी बनी हुई है। 22 खूट परिवार में आज सदस्यों की संख्या हजारों में पहुँच चुकी है।

कुंजेमान जी से अब तक का वंश वृक्ष और उनसे पहले की पीढ़ी की जानकारी वंशावली सेक्शन में देख सकते हैं।

22 खूट परिवार की संरचना

बीस खूट पारिवारिक वंशजों के तथा दो खूट भैगनमानों के

3

वंशीलाल चौधरी

तीन पुत्रों से 3 खूट
5

मटुकी नाथ चौधरी

पाँच पुत्रों से 5 खूट
8

काशी नाथ चौधरी

आठ पुत्रों से 8 खूट
4

माखनलाल चौधरी

चार पुत्रों से 4 खूट
3 + 5 + 8 + 4 = 20 + 2 भैगनमान = 22 खूट परिवार
कुल परंपरा

माँ भगवती त्रिपुरसुंदरी

🪔

पूजा और पारिवारिक उत्तरदायित्व

परिवार के माँ भगवती त्रिपुरसुंदरी मंडप के निर्माण, रख-रखाव, दुर्गा पूजा के आयोजन सहित अन्य सभी खर्चों का वहन 22 खूट परिवार द्वारा ही किया जाता है।

परिवार के बाहर के लोगों से किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग नहीं लेने की पुरातन परंपरा अनवरत जारी है।

आज का 22 खूट चौधरी परिवार मोतिया के नाम से विख्यात है, जो शांडिल्य गोत्रीय है।

भैगनमानों के 02 खूट की दुर्गा पूजा में कोई सक्रिय भूमिका निर्धारित नहीं की गई है।

दुर्गा पूजा के दौरान सिर्फ 20 खूट के परिवार के प्रमुख के नाम का संकल्प हर रोज होता है।

🙏 जय माँ भगवती त्रिपुर सुंदरी 🙏