मेरे पिता स्वर्गीय प्राणधन चौधरी और माता स्वर्गीय सावित्री देवी को ईश्वर ने पांच संतानों का उपहार दिया | दो पुत्री और तीन पुत्र | इन पाँचों में मैं सबसे छोटा था | घर का सबसे छोटा होने के कारण माता -पिता और भाई बहनों का सदैव लाडला रहा | लाड - दुलार से नटखटपने का हर रोज नए कीर्तिमान स्थापित होने लगे |जैसे -जैसे बड़ा होता गया वैसे-वैसे बदमाशियों का स्तर भी बढ़ता गया | घर में डांट मिलना और नियमित पिटाई होना दिनचर्या का लगभग हिस्सा बन चुका था | डांट की मात्रा बढ़ने और पिटाई की गुणवत्ता में उत्तरोत्तर बृद्धि की एक विशेष वजह ये भी थी कि मुझसे बड़े भाई बिभान्शु शेखर चौधरी पढ़ाई में अव्वल थे| प्रथम कक्षा से ही क्लास में प्रथम स्थान लाते थे और मैं हर कक्षा में बमुश्किल पास हो पाता था |
खेल का संस्कार मेरे पिता जी स्वर्गीय प्राणधन चौधरी की रगों में था | वो अपने जमाने में फुटबॉल और वॉलीबाल के स्थानीय स्तर के अच्छे खिलाड़ी हुआ करते थे | पिताजी की प्रेरणा ,उनके समर्थन का ही परिणाम रहा कि वर्ष 1985 या 1986 में भागलपुर विश्वविद्यालय के टीएनबी कॉलेज के बैडमिंटन कोर्ट में आयोजित अंतर् महाविद्यालय बैडमिंटन प्रतियोगिता में तीनों भाई अलग अलग महाविद्यालय का प्रतिनिधित्व कर रहे थे | बड़े भाई सुधांशु पीजी विभाग ,बिभान्शु भागलपुर इनजयरिंग कॉलेज और मैं साहिबगंज कॉलेज का प्रतिनिधित्व कर रहा था | बैडमिंटन के अलावा टेबल टेनिस में भी साहिबगंज कॉलेज का प्रतिनिधित्व विश्वविद्यालय स्तर के प्रतियोगिता में करने का गौरव मुझे हासिल हुआ |
साहिबगंज के रेलवे स्कूल के दिनों में एनसीसी में भी कई तरह कैंपों का हिस्सा रहा | एनसीसी के 23 बटालियन के सर्वश्रेष्ठ कैडेट के रूप में चयनित हुआ| वर्ष 1983 में 720 रूपये का स्कॉलरशिप एनसीसी में मिला जो जीवन की पहली कमाई थी |
साहिबगंज महाविधालय से इंटर करने के बाद स्नातक की पढ़ाई करने पिता जी ने दिल्ली भेज दिया| दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की | नई दिल्ली स्थित वाईएमसीए संस्थान से पत्रकारिता में पी जी डिप्लोमा की डिग्री प्राप्त की | पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद लगभग 15 वर्षों तक कई मिडिया संस्थानों (प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक ) में नौकरी की |
इसी दौरान मूलतः जिला दुमका, ग्राम चुटिया निवासी और बिहार बिजली बोर्ड,पटना में कार्यरत श्री विनोद मिश्रा और श्रीमती मंजू मिश्रा की तीसरी सुपुत्री श्वेता से मेरा विवाह पटना के बिजली बोर्ड आवास कॉलोनी में हुआ | जब विवाह हुआ उस वक़्त मैं दिल्ली में पत्रकारिता कर रहा था| बावजूद इसके विवाह के सन्दर्भ में मेरी सोच बेहद पारंपरिक और रूढ़िवादी रही | मैंने अपने पिता और बड़े भाई पर निर्णय छोड़ दिया था | यही वजह रही कि विवाह से पूर्व मुझसे लड़की देखने का आग्रह किया गया लेकिन पारिवारिक रीति रिवाज़ और सामाजिक परम्पराओं के अनुसार मैं विवाह पूर्व होने वाली पत्नी से न ही मिला और न ही तस्वीर देखी | इस बात का उल्लेख मैं सिर्फ इसलिए कर रहा हूँ ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ी अपने पारिवारिक और सामाजिक सरोकार के प्रति समर्पित रहने का प्रयास करें | जीवन में मिली सफलताओं में पत्नी श्वेता का सहयोग अतुल्नीय रहा | पत्नी ने माता -पिता की सेवा में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी | पिता जी के देहांत के बाद मेरी माता जी अधिकतर समय दिल्ली में रही | पत्नी श्वेता ने वृद्ध माँ के स्वास्थ्य देखभाल के साथ उनकी हर आवश्यकताओं को पूरा करना अपना धर्म मान कर मुझे हर प्रकार के तनाव से मुक्त कर दिया | मेरा ये अनुभव रहा है कि घर के मोर्चे से जो पुरुष चिंता मुक्त रहता है वो अपने कार्यक्षेत्र में अपना सौ प्रतिशत दे पाता है और अपेक्षाकृत ज्यादा सफल होता है | इस मामले में मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ और जीवन की सफलताओं में पत्नी का सहयोग अविस्मरणीय मानता हूँ | ईश्वर की कृपा से मुझे दो पुत्र हुए | निलेश और अन्वेश | अपनी दादी के साथ बचपन बिताने और लोक कहानियां सुनने के कारण दोनों बच्चों ने अब तक पारिवारिक संस्कारों के प्रति सकारत्मक रुख परिलक्षित किया है| बाबा -दादी ,नाना -नानी और परिवार के सभी बड़ों के आशीर्वाद से सिंचित दोनों पुत्रों ने वर्ष 2025 में बेहद कठिन माने जाने वाले अखिल भारतीय परीक्षा में बेहतर परिणाम लाया | बड़े पुत्र नीलेश ने एमबीए में दाखिले के लिए आयोजित कैट परीक्षा में 99.22 पर्सेंटाइल लाकर मुम्बई आईआईटी में एमबीए की पढ़ाई के लिए दाखिला पाया | छोटे पुत्र अन्वेश ने जेईई एडवांस की परीक्षा में देश भर में सम्मानजनक रैंक ला कर आईआईटी में दाखिला पाया |
पत्रकारिता के बाद श्री शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले मैं उनका राष्ट्रीय मीडिया सलाहकार रहा|श्री शिबू सोरेन के दुसरे मुख्यमंत्रित्व काल में मेरी नियुक्ति मुख्यमंत्री के राजनीतक सलाहकार के रूप में हुई | श्री हेमंत सोरेन ने भी अपने पहले मुख्यमंत्रित्व काल में मुझे अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किया | मेरे लिए ये गर्व का विषय है की मैं पिता और पुत्र दोनों का राजनीतिक सलाहकार रहा | देश - दुनिया में कई पिता पुत्र मुख्यमंत्री हुए है लेकिन पिता- पुत्र दोनों के राजनीतिक सलाहकार होने का गौरव प्राप्त करने का श्रेय संभवतः सिर्फ मुझे ही हासिल हो पाया है। ऐसी विशिष्ट उपलब्धि मां त्रिपुर सुंदरी की विशेष कृपा और माता-पिता के आशीर्वादों का ही प्रतिफल हो सकता है। उच्च पद हासिल कर लेना मात्र ही मेरे जीवन की उपलब्धि कभी नहीं रही | हासिल पद की जिम्मेवारियों के निर्वाहन के दौरान विशिष्ट पहचान बनाना और नए मानक तय करना सदैव लक्ष्य रहा | इस लक्ष्य निर्धारण के कारण ही श्री शिबू सोरेन जैसे स्थापित वृहत जन समर्थन वाले नेता के मीडिया और फिर राजनीतिक सलाहकार की भूमिका के दौरान एक अलग पहचान बना पाया | श्री हेमंत सोरेन को राजनीति में स्थापित करने की प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा करने के अवसर को मुकाम तक पहुँचाना एक कठिन चुनौती रही | पारदर्शी सोच,ईमानदार कार्यप्रणाली और निःस्वार्थ समर्पण ने पूरे राज्य में एक पहचान दिलाई | उच्च पद पर रहते हुए अपने नीति -सिद्धांत पर अड़े रहने के संपल्प ने मुझे औरो से अलग पहचान बनाने में मदद की |तत्कालीन मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहने के दौरान अपने पैतृक गांव मोतिया में बने सरकारी हॉस्पिटल का उद्घाटन वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन से करवा कर अपनी माटी का क़र्ज़ चुकाया | श्री हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री रहते हुए मेरे व्यक्तिगत आग्रह पर वर्ष 2014 में दुर्गा पूजा के दौरान मेरे मोतिया स्थित आवास पहुंचे | 22 खूंट की मां त्रिपुर सुंदरी के दरबार में हाज़री लगाई |मां त्रिपुर सुंदरी की विशेष कृपा श्री हेमंत सोरेन ने पाई | पिता श्री शिबू सोरेन और पुत्र श्री हेमंत सोरेन दोनों का मेरे व्यक्तिगत आग्रह पर मोतिया गांव पहुंचना उन दोनों का मेरे प्रति विश्वास पूर्ण सोच का परिचायक रहा |
मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार के बाद मेरी नियुक्ति राज्य सूचना आयुक्त के रूप में हुई,फिर कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया |इस पद पर मुख्य सचिव के बराबर का वेतन और अन्य सुविधा मिलती रही | पांच साल के सूचना आयुक्त और कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त के कार्यकाल में सूचना आयोग की पारदर्शिता को नए मुकाम तक पहुंचाने के प्रयास ने बेहद संतोष दिया |मेरे कार्यकाल के दौरान राज्य भर के अपीलकर्ताओं का सूचना आयोग के प्रति नज़रिये में आये सकारात्मक बदलाव को मैं अपने कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि मानता हूँ|
उपरोक्त पद पर सेवा प्रदान करने के बाद समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की खाद्यान्न और पोषण आहार योजना की निगरानी के लिए बने खाद्य आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया | इस पद पर भी मुख्य सचिव के बराबर का वेतनमान और अन्य सुविधाएं देय होती है | मेरे कार्यकाल के दौरान झारखण्ड के खाद्य आयोग ने देश भर में अपनी अलग पहचान बनाई | झारखण्ड खाद्य आयोग देश भर का एक मात्र ऐसा आयोग बना जिसने राज्य भर के सभी जिलों का भ्रमण कर सम्बंधित जिलों के सभी मुखिया से सीधा संवाद किया | मुखिया को खाद्य सुरक्षा अधिनियम की जानकारी दी गयी| मुखिया को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया गया | औचक निरीक्षण के माध्यम से लाभुकों की हक़मारी करने वालों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की गयी | खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन में बेहतर कार्य करने वाले सभी जिलों के तीन मुखिया को सम्मानित किया गया | इन प्रयासों से मन को शुकुन मिला | गरीबों को उनका हक दिलाने से जो संतोष मिला वो शायद अरबों कमा लेने से भी नहीं मिलता |
कुल देवी माँ त्रिपुर सुंदरी | बाबा स्वर्गीय कृतनाथ चौधरी, दादी स्वर्गीय चूना देवी | नाना स्वर्गीय रूद्र नारायण झा, नानी स्वर्गीय मूला देवी | पिता स्वर्गीय प्राणधन चौधरी माता स्वर्गीय सावित्री देवी और माँ स्वरुप बड़ी बहन स्वर्गीय रेणु झा के आशीर्वादों ने सदैव राह दिखाया |
जड़ से जुड़ाव | अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति सम्पूर्ण समर्पण ही जीवन का दर्शन रहा है | नीति -सिद्धांत पर चलना और स्वाभिमान से किसी भी हालत में समझौता नहीं करने के फलसफे ने कई उंचाईया दी तो इसी फलसफे ने कई कुर्बानियां भी ली | जो मिला उसे जीया ,जो नहीं मिला उसकी कसक कभी नहीं रही |
जय मां त्रिपुर सुंदरी ।